
सीडीओ सुनील कुमार धनवंता बोले— प्रत्येक बच्चे को निपुण बनाना प्रशासन और शिक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता
By: Shamikh Rais Siddiqui
बहराइच, 29 जुलाई। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और निपुण भारत मिशन के उद्देश्यों को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में बहराइच के हरियाली रिजॉर्ट में ‘निपुण संकल्प कार्यशाला-2026’ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यशाला में तीन जिलों—बहराइच, गोंडा और श्रावस्ती—के शिक्षा अधिकारियों, शिक्षाविदों और शैक्षणिक विशेषज्ञों ने भाग लेकर आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन) को मजबूत बनाने तथा प्रत्येक बच्चे को कक्षा तीन तक निपुण बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य विकास अधिकारी सुनील कुमार धनवंता, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आशीष कुमार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक सर्वदानंद, सहायक निदेशक बेसिक शिक्षा राम सागर पति त्रिपाठी सहित अन्य अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया। छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समारोह को आकर्षक बना दिया। प्रस्तुतियों में भारतीय संस्कृति और स्थानीय लोक परंपराओं की सुंदर झलक दिखाई दी।
मुख्य विकास अधिकारी सुनील कुमार धनवंता ने कहा कि निपुण भारत मिशन केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि प्रशासन और शिक्षा विभाग के समन्वित प्रयासों से जिले के प्रत्येक विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण, आनंददायी और गतिविधि आधारित शिक्षण वातावरण विकसित किया जाएगा, जिससे समयबद्ध तरीके से प्रत्येक बच्चे को निपुण बनाया जा सके।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आशीष कुमार सिंह ने कहा कि निपुणता केवल विभागीय लक्ष्य नहीं बल्कि सभी शिक्षकों, अधिकारियों और अभिभावकों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने खंड शिक्षा अधिकारियों, स्टेट रिसोर्स ग्रुप (एसआरजी), एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) तथा शिक्षकों से विद्यालयों में नियमित शैक्षणिक सहयोग, प्रभावी अनुश्रवण और नवाचारों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
जिला विद्यालय निरीक्षक सर्वदानंद ने कहा कि मजबूत बुनियादी शिक्षा ही भविष्य की संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था का आधार है। उन्होंने शिक्षा विभागों के बीच बेहतर समन्वय और गुणवत्ता सुधार के लिए संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
सहायक निदेशक बेसिक शिक्षा राम सागर पति त्रिपाठी ने अपने संबोधन में कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए प्रभावी मॉनिटरिंग, परिणाम आधारित कार्य संस्कृति और नवाचारों का विस्तार आवश्यक है। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं शिक्षकों से मिशन मोड में कार्य करने का आह्वान किया।
कार्यशाला में उपस्थित डायट प्राचार्यों ने शिक्षक क्षमता विकास, सतत व्यावसायिक प्रशिक्षण, दक्षतामूलक शिक्षण और प्रभावी मूल्यांकन प्रणाली को निपुण भारत मिशन की सफलता का आधार बताते हुए निरंतर शैक्षणिक सहयोग और मार्गदर्शन का भरोसा दिलाया।
कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में राज्य परियोजना कार्यालय की निपुण सेल के विशेषज्ञों ने निपुण भारत मिशन की नवीन रणनीतियों, दक्षतामूलक शिक्षण, एफएलएन संकेतकों, शैक्षणिक मूल्यांकन, टीएलएम के प्रभावी उपयोग, विद्यालय अनुश्रवण तथा डेटा आधारित योजना निर्माण पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से अपनी शंकाओं का समाधान प्राप्त किया और विभिन्न विकासखंडों में किए जा रहे नवाचारों एवं सफल प्रयोगों को साझा किया।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कहा कि इसका उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को कक्षा तीन तक आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान से दक्ष बनाना, बाल-केंद्रित एवं गतिविधि आधारित शिक्षण को बढ़ावा देना, विद्यालयों में नियमित मूल्यांकन एवं अनुश्रवण को सुदृढ़ करना तथा विद्यालय, शिक्षक, अभिभावक और समुदाय के बीच प्रभावी सहभागिता विकसित करना है।
बीईओ, एसआरजी और एआरपी ने अपने-अपने विकासखंडों के सफल शैक्षणिक नवाचारों, चुनौतियों और समाधान प्रस्तुत किए। उन्होंने विद्यालय स्तर पर नियमित कक्षा अवलोकन और दक्षता आधारित शिक्षण को और प्रभावी बनाने का संकल्प व्यक्त किया।
कार्यशाला के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि जिले के प्रत्येक बच्चे को आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान से दक्ष बनाते हुए निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को पूर्ण समर्पण और उत्तरदायित्व के साथ हासिल किया जाएगा।
कार्यक्रम में बहराइच, गोंडा और श्रावस्ती के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों, संबंधित डायट प्राचार्यों, जिला विद्यालय निरीक्षकों, खंड शिक्षा अधिकारियों, स्टेट रिसोर्स ग्रुप, एकेडमिक रिसोर्स पर्सन तथा राज्य परियोजना कार्यालय की निपुण सेल के विशेषज्ञों और अधिकारियों ने सहभागिता की। अंत में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया गया कि कार्यशाला से प्राप्त अनुभव और सुझाव निपुण भारत मिशन को नई गति प्रदान करेंगे।
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